उत्तराखंड : अटल के स्वप्न से मोदी के स्वर्ण युग तक
जब किसी भूमि की मिट्टी में तप बस जाए, उसकी नदियों में संस्कार बहने लगें और उसकी हवा में आस्था तैरने लगे तब वह भूमि मात्र एक प्रदेश नहीं रहती, वह एक प्रार्थना बन जाती है। उत्तराखंड ऐसी ही पवित्र भूमि है जिसने संघर्ष से सृजन और सृजन से स्वाभिमान की ऐतिहासिक यात्रा तय की है।
यह वही देवभूमि है, जिसे हमारे युगपुरुष, भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी ने राज्य का दर्जा दिया। यह निर्णय केवल एक राजनीतिक घोषणा नहीं था यह एक भावनात्मक संस्कार था, जिसने दशकों के जनसंघर्ष को सम्मान दिया और उत्तराखंड को एक नई पहचान दी।
अटल जी ने हमें यह राज्य देकर केवल सीमाएँ नहीं दीं, बल्कि एक उत्तरदायित्व सौंपा कि हम इस भूमि को समृद्ध, सशक्त और सांस्कृतिक रूप से संपन्न बनाएँ।
स्वप्न से साकार तक — 25 वर्षों की यात्रा
आज जब उत्तराखंड अपनी स्थापना के 25 गौरवशाली वर्ष मना रहा है, तो मेरा हृदय गर्व और आनंद से भर उठता है। यह वह स्वप्न है, जो मैंने वर्षों पहले देखा था और आज वह साकार रूप में हमारे सामने खड़ा है।
मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2010 में मैंने विकसित उत्तराखंड का जो सपना देखा था — वह अब साकार होता दिखाई दे रहा है। मुझे याद है, मैंने उस समय कहा था कि “उत्तराखंड को हमें ऐसा आदर्श राज्य बनाना है जो अन्य सभी पर्वतीय राज्यों के लिए मॉडल हो।”
आज, जब मैं प्रदेश की गति, दिशा और उपलब्धियों को देखता हूँ, तो विश्वास से कह सकता हूँ कि वह सपना अब वास्तविकता बन चुका है।
अटल जी के संकल्प से मोदी जी के स्वर्ण युग तक
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में उत्तराखंड आज अटल जी के स्वप्न को स्वर्ण युग में बदल रहा है।
मोदी जी ने इस देवभूमि को “हिमालय की आत्मा” कहा है और सच में, यह वही आत्मा है जो भारत के हृदय में स्पंदित होती है।
उनके मार्गदर्शन में उत्तराखंड आज विकसित भारत के सपने को साकार करने वाली सशक्त कड़ी बन गया है।
आर्थिक सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन विकास, और महिलाओं की भागीदारी — इन सभी क्षेत्रों में उत्तराखंड ने अभूतपूर्व प्रगति की है।
संवेदना से शासन की परिभाषा तक
मुख्यमंत्री के रूप में मेरा प्रयास सदैव यह रहा कि शासन केवल व्यवस्था न रहे, बल्कि संवेदना बने।
इसी सोच से हमने 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा शुरू की जिसने हजारों जीवन बचाए और स्वास्थ्य सेवाओं को गाँव-गाँव तक पहुँचाया। हमने संवेदना अभियान आरंभ किया रक्तदान को जनआंदोलन में बदल दिया। मुझे स्मरण है, जब मैंने स्वयं रक्तदान कर युवाओं से कहा था “रक्तदान केवल जीवन नहीं देता, यह मानवता को जीवित रखता है।” यह अभियान आज भी उत्तराखंड की संवेदनशील आत्मा का प्रतीक है।
आपदा से अवसर — पुनर्जागरण की कहानी
उत्तराखंड ने हर चुनौती को अवसर में बदला है।
2013 की केदारनाथ आपदा मानवता के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक थी। लेकिन जब मंदिरों की घंटियाँ मौन हुईं, तब सेवा की आवाज़ गूँजी; जब पर्वत खामोश थे, तब मानवता बोल उठी।
आज वही केदारनाथ पहले से अधिक भव्य, दिव्य और वैभवशाली है। यह केवल पुनर्निर्माण नहीं — यह पुनर्जागरण है। यह देवभूमि की अक्षय आस्था का प्रतीक है।
सांस्कृतिक आत्मा और विकास की दिशा
उत्तराखंड का हृदय उसकी संस्कृति में बसता है।
यहाँ का हर पर्व हरेला, फूलदेई, नन्दा राजजात जीवन के दर्शन का उत्सव है। यहाँ के लोकगीतों में पहाड़ों की पीड़ा भी है और गरिमा भी। यह प्रदेश हमें सिखाता है कि सादगी भी शक्ति है और संस्कृति ही विकास की आत्मा।
नई ऊर्जा, नया संकल्प
आज मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के नेतृत्व में उत्तराखंड नवजीवन पा रहा है। उन्होंने युवा ऊर्जा और दृढ़ संकल्प के साथ “विकसित उत्तराखंड 2025” के संकल्प को जनआंदोलन बना दिया है। उनके नेतृत्व ने यह सिद्ध किया है कि परंपरा और प्रगति साथ-साथ चल सकती हैं जब नीयत स्पष्ट हो और निष्ठा अटूट।
रजत जयंती: स्मरण नहीं, संकल्प का क्षण
यह रजत जयंती केवल बीते वर्षों का उत्सव नहीं, बल्कि आने वाले युगों की पुकार है। यह वह क्षण है जब हम अतीत की साधना को भविष्य के संकल्प से जोड़ सकते हैं।
हमें यह प्रण लेना होगा कि “इस भूमि की पवित्रता, इस जल की निर्मलता और इस संस्कृति की गरिमा हम आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुँचाएँगे।”
देवभूमि की पुकार
उत्तराखंड कोई प्रदेश नहीं यह एक प्रार्थना है, जो हर सुबह गंगा की लहरों पर लिखी जाती है, और हर संध्या हिमालय की चोटियों पर गूँजती है। इस देवभूमि की मिट्टी में जो आस्था है, वह हमारी सबसे बड़ी पूँजी है। अब समय है कि हम सब मिलकर कहें “अब हमें और ऊँचा उठना है।”
उत्तराखंड की यह यात्रा किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक विचार की यात्रा है उस विचार की, जो संघर्ष में विश्वास रखता है, सेवा में आनंद पाता है, और संस्कृति में दिशा खोजता है।
आज मैं गर्व से कह सकता हूँ उत्तराखंड का सपना अब साकार हो रहा है। यह अटल जी के संकल्प से शुरू होकर मोदी जी के स्वर्ण युग तक पहुँचने वाली देवभूमि की प्रेरणादायक यात्रा है।

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