रहस्यमयी गुफा हुई प्रकट, भोलेनाथ के साक्षात दर्शन.

रहस्यमयी गुफा हुई प्रकट, भोलेनाथ के साक्षात दर्शन.

बागेश्वर: देवभूमि उत्तराखंड, जहां हर पत्थर पूजनीय है और हर जगह आस्था से पवित्र हो जाती है, वहां एक और अद्भुत चमत्कार सामने आया है। बागेश्वर जनपद के दूरस्थ क्षेत्र धारी-डोबा गांव के समीप एक रहस्यमयी प्राचीन गुफा प्रकट हुई है, जिसने श्रद्धालुओं और जिज्ञासु लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है। गुफा के भीतर से निरंतर दूध जैसी सफेद धाराएं प्रवाहित हो रही हैं। कहा जा रहा है कि यह स्थल भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों को रहस्मयी गुफा में लिंग प्रस्फुटन के रूप में दर्शन दे रहे हैं। भक्त अपने बीच भगवान पाकर फुले नहीं समा रहे हैं।

गुफा बनी आस्था और आकर्षण का केंद्र

गुफा के अंदर प्रवेश करते ही प्राकृतिक रूप से निर्मित शिवलिंगाकार चट्टानें, शीतल वातावरण और गुंबदाकार कक्ष अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं। संकरी राहों से होते हुए जब श्रद्धालु भीतर पहुंचते हैं, तो उन्हें एक विशाल गुंबदनुमा कक्ष मिलता है, जहां की शांति और रहस्य उन्हें भक्ति में लीन कर देते हैं। स्थानीय ग्रामीण रमेश सिंह टंगड़िया, जो धारी गांव के समीपवर्ती किसान हैं, बताते हैं कि यह गुफा सतयुग काल की मानी जाती है। उनका कहना है कि प्राचीन काल में एक महर्षि ने यहीं तपस्या की थी और ‘खीर’ बनाई थी। तभी से इस स्थल से दूध जैसी धारा बहती रही है, जो आज भी चमत्कारिक रूप में प्रवाहित हो रही है। वैज्ञानिक रूप से भी कुमाऊं के युवा पहाड़ों में कैल्शियम की अधिकता सभी जगह रहती हैं। शायद दूध से सफेद धाराओं का बहाना इसी बात को और संकेत करता हो। व्यवसायी दयाल पांडे बताते है गुफा के आस पास और भीतर की प्राकृतिक बनावट और सौंदर्य से इसके प्राचीन होने की गवाही देती हैं। इन शिलालेखों को बजाने पर अद्भुत आवाजें जैसे मृदंग, ढोल, तबला और नाद निकलती हैं।
इन्हीं आश्चर्यों को जानने , समझने और भोले नाथ के साक्षात दर्शन को लोगों की आस्था उमड़ रही हैं । जैसे-जैसे इस गुफा की खबर फैली, भक्तों का तांता लग गया। दूर-दूर से लोग भोलेनाथ के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। आसपास के गांवों में लोगों में गुफा के प्रति जिज्ञासा बनी हुई हैं ।
कुछ समय पूर्व नागा बाबा देवगिरी महाराज यहां रूके थे, पर अनजाने में वे स्थान छोड़ गए। अब इसी स्थल पर, जो हनुमान मंदिर, चामलिया उडयार क्षेत्र के पास है, प्रतिदिन पूजा-अर्चना और आरती हो रही है। बाबा द्वारा यहां पूर्व में एक धूनी भी स्थापित की गई थी।
संरक्षण और विकास की मांग. ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन से गुफा स्थल के संरक्षण और विकास की मांग की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि यदि यहां सड़क, प्रकाश व्यवस्था और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो यह स्थान क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक व पर्यटन केंद्र बन सकता है।
इससे जहां स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं पर्यटन से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।
यह नव-प्रकट गुफा अब बागेश्वर जिले के लिए आस्था और आकर्षण का नया केंद्र बन सकती है। स्थानीय जनमानस का विश्वास है कि उचित प्रबंधन और प्रचार के साथ यह स्थल शीघ्र ही उत्तराखंड के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल होने की योग्यता रखता हैं। भारतीय पुरातत्व संरक्षण से लोगों ने इस रहस्यमयी गुफा के संरक्षण, संवर्धन करने का आग्रह किया हैं।

प्रेम प्रकाश उपाध्याय “नेचुरल” उत्तराखंड
(शोध,प्रकृति प्रेमी, पर्यावरण और शिक्षा से संबंध)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *