ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय में हुआ प्रोफेसर (डॉ.) दिनेश चमोला ‘शैलेश’ का* *भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दों का निर्माण’ विषयक व्याख्यान

 

ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय में हुआ प्रोफेसर (डॉ.) दिनेश चमोला ‘शैलेश’ का* *भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दों का निर्माण’ विषयक व्याख्यान

*ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय* , देहरादून के अंग्रेजी विभाग तथा *शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग,* उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘ *एकीकृत शब्दावली की ओर : उच्च शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दों का निर्माण’* विषयक *द्विदिवसीय राष्ट्रीय* संगोष्ठी में प्रो. चमोला द्वारा आमंत्रित *विषय विशेषज्ञ (Resource Person)* के रूप में प्रभावी व्याख्यान दिया गया । गौरतलब है कि विभिन्न विधाओं में सात दर्जन से अधिक पुस्तकें का लेखन करने वाले चर्चित साहित्यकार, *साहित्य अकादमी* के *बाल साहित्य पुरस्कार विजेता* प्रो. चमोला पिछले तीन दशकों से आयोग की संगोष्ठियों में विषय विशेषज्ञ के साथ-साथ विभिन्न शब्दकोशों एवं शब्दावलियों के निर्माण में देश के प्रतिष्ठित शब्दावली मर्मज्ञों के साथ *सम्मानित शब्दावली विशेषज्ञ* के रूप में काम कर चुके हैं । ध्यातव्य है कि 14 जनवरी, 1964 को उत्तराखंड के *रुद्रप्रयाग जनपद* के *ग्राम कौशलपुर* में स्वर्गीय पं. चिंतामणि चामोला ज्योतिषी एवं माहेश्वरी देवी के घर मेँ जन्मे प्रो. चमोला ने शिक्षा में प्राप्त कीर्तिमानों यथा एम.ए. अंग्रेजी, प्रभाकर; एम. ए. हिंदी (स्वर्ण पदक प्राप्त); पीएच-डी. तथा डी.लिट्. के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में भी
राष्ट्रव्यापी पहचान निर्मित की है। अभी तक प्रो. चमोला ने उपन्यास, कहानी, दोहा, कविता, एकांकी, बाल साहित्य, समीक्षा, शब्दकोश, अनुवाद, व्यंग्य, लघुकथा, साक्षात्कार, स्तंभ लेखन के साथ-साथ एवं साहित्य की विविध विधाओं में सात दर्जन से अधिक पुस्तकों में लेखन किया है ।
आपकी चर्चित पुस्तकों में ‘संपूर्ण कहानियां’, ‘यादों के खंडहर, ‘टुकडा-टुकड़ा संघर्ष, ‘प्रतिनिधि बाल कहानियां, ‘श्रेष्ठ बाल कहानियां, ‘दादी की कहानियां¸ नानी की कहानियां, माटी का कर्ज, ‘स्मृतियों का पहाड़, ‘क्षितिज के उस पार, ‘कि भोर हो गई, ‘कान्हा की बांसुरी, ’मिस्टर एम॰ डैनी एवं अन्य कहानियाँ, ‘इक्कीस श्रेष्ठ कहानियां’, ‘एक था रॉबिन, ‘पर्यावरण बचाओ, ‘नन्हे प्रकाशदीप’, ‘एक सौ एक बालगीत, ’मेरी इक्यावन बाल कहानियाँ, ‘बौगलु माटु त….,‘विदाई, ‘अनुवाद और अनुप्रयोग, ‘प्रयोजनमूलक प्रशासनिक हिंदी, ‘झूठ से लूट’, ‘गाएं गीत ज्ञान विज्ञान के’ ‘मेरी 51 विज्ञान कविताएँ’ तथा ‘व्यावहारिक राजभाषा शब्दकोश’ आदि प्रमुख हैं।
आपके व्यापक मौलिक साहित्य पर देश के अनेक विश्वविद्यालयों में पीएच-डी.तथा एम.फिल. स्तरीय कई शोध कार्य संपन्न हो चुके हैं तथा अनेक विश्वविद्यालयों में वर्तमान में चल रहे हैं ।
आपको उत्कृष्ट साहित्य सृजन एवं उल्लेखनीय हिंदी सेवा हेतु देश-विदेश की साठ से अधिक संस्थाओं द्वारा सम्मान/पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
आपके संपादन में 22 वर्षों से प्रकाशित बहुचर्चित हिंदी पत्रिका *‘विकल्प’* ने राष्ट्रीय स्तर पर अपने महत्वपूर्ण विशेषांकों के माध्यम से अपनी अलग पहचान अर्जित की है। डॉ॰ चमोला ने भारत सरकार में संयुक्त निदेशक (हिन्दी) सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया है तथा पूर्व में आप भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून में राजभाषा के प्रमुख रहे हैं तथा वर्तमान में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आधुनिक ज्ञान विज्ञान संकाय के पूर्व डीन, कुलानुशासक तथा भाषा एवं आधुनिक ज्ञान विज्ञान के अध्यक्ष रहे हैं । आप गढ़ विहार में रहते हैं ।
डॉ॰ चमोला ने देश के शताधिक विद्वानों के साक्षात्कार लिए हैं। अपने अनेक साक्षात्कार, रचनाओं का प्रसारण देश के 8 दूरदर्शन केंद्रों तथा 12 आकाशवाणी केंद्रों से प्रसारित हुए हैं । आप देश-विदेश की सैकड़ों पत्र-पत्रिकाओं के स्थापित लेखक हैं ।
आपके उपन्यास *‘टुकड़ा-टुकड़ा संघर्ष’* का कन्नड़ भाषा तथा अनेक रचनाओं का विभिन्न भारतीय एवं देशी-विदेशी भाषाओं में अनुवाद एवं प्रकाशन हुआ है जो प्रदेश के लिए गौरव का विषय है ।
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*प्रो. (डॉ.) दिनेश चमोला ‘शैलेश’*, डी.लिट्.*

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