चमको नन्हें सितारों
नन्हें–नन्हें सपनों की जैसी,
कोमल उजली मुस्कान हो तुम,
सुबह की स्वर्णिम किरणों में
बिखरी सबसे प्यारी जान हो तुम।।
तुम बच्चे नहीं, ऊर्जा–स्रोत,
कल की नई शक्ति का संभार,
हर मुश्किल में छुपी तुम्हारे
जीत की पूजा, उम्मीद अपार।।
गिरकर भी जो उठना सीखो,
गलतियाँ दीपक बन जाएँ,
कल की ऊँची उड़ानों को
ये अनुभव पंख लगाएँ।।
सपनों की राहों पर चलकर
विश्वास का दीप जलाना तुम,
किसी की सूनी आँखों में
मुस्कान का रंग सजाना तुम।।
दुनिया चाहे लाख रोके,
कह दे— “तुम नहीं कर पाओगे,”
पर तुम हिम्मत के दीपक हो,
सपनों को सच बनाओगे।।
मेहनत की तपती धूप में
और अधिक दमकोगे तुम,
हर नए सवेरे की किरण में
अपनी राह स्वयं लिखोगे तुम।।
नन्हीं चिड़िया–सी उड़ानों में,
तितली जैसे रंग हजार,
तुम अनमोल, अद्भुत बच्चे,
धरती का सबसे सुंदर उपहार।।
हर पल नई उम्मीद धरे
प्रेम तुम्हीं से जग महके,
तुमसे ही कल की रोशनी
तुमसे ही सपनों के रेखे।।
— प्रेम प्रकाश उपाध्याय “नेचुरल”, उत्तराखंड
