देहरादून स्थित इक्फाई विश्वविद्यालय में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने कानून के छात्रों को संबोधित किया।
भगत सिंह कोश्यारी ने संवैधानिक पदों पर रहते हुए सुशासन पर अपने अनुभव और विचारों को सांझा किया। दरअसल विश्वविद्यालय के लॉ स्कूल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भगत सिंह कोश्यारी को बतौर मुख्य अतिथि एवं वक्ता आमंत्रित किया गया था जिसमें संवैधानिक एवं प्रशासन के विषय पर बोलते हुए उन्होंने आपातकाल के दौर का भी ज़िक्र किया। कोश्यारी ने कहा कि संविधान में आपातकाल के दौरान जोड़े गए दो शब्द समाजवाद एवं पंथनिरपेक्षता संविधान निर्माताओं की देन नहीं थे। उन्होंने एक कुशल राजनेता यानि स्टेट्समैन और राजनीतिज्ञ के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि राजनीतिज्ञ चुनाव में जीतने को अपना लक्ष्य मानता है जबकि कुशल राजनेता चुनाव नहीं बल्कि पीढ़ियों के विकास एवं कल्याण को ही अपना मुख्य उद्देश्य मानकर राजनीति करता है।
दरअसल इस कार्यक्रम की शुरुआत वृक्षारोपण के साथ हुई। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ रमेश चंद्र रमोला एवं डीन डॉ मोनिका खरोला ने मुख्य अतिथि कोश्यारी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया और संस्थान में पधारने के लिए उनका आभार प्रकट किया। अपने संबोधन के पश्चात भगतदा ने छात्रों के सवालों का जवाब भी दिया। एक छात्र द्वारा दिल्ली आतंकी ब्लास्ट पर पूछे गए सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि देश का सुरक्षाबल और ख़ुफ़िया तंत्र भले ही इस ब्लास्ट को रोकने में सफल नहीं रहा लेकिन पूरा सुरक्षा तंत्र बहुत सक्रियता के साथ देश की रक्षा कर रहा है जिसका परिणाम हम नक्सलियों के सफाया और कई आतंकियों की धर पकड़ के रूप में देख सकते हैं। कार्यक्रम में बतौर समन्वयक एसोसिएट प्रोफेसर डॉ शालिनी बहुगुणा ने अहम भूमिका निभाई। डॉ अरुण कुमार सिंह, डॉ राजीव भारतीय, माधुरी पुंडीर एवं संजीव बिष्ट सहित सैकड़ों की संख्या में शिक्षक एवं छात्र मौजूद रहे।
